धूप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो,
ज़िंदगी क्या है किताबों को हटा कर देखो..............,
वो सितारा है चमकने दो यूँ ही आँखों में,
क्या ज़रूरी है उसे जिस्म बनाकर देखो................,
पत्थरों में भी ज़ुबां होती है दिल होते हैं,
अपने घर के दरोदीवार सजा कर देखो............,
फ़ासला नज़रों का धोखा भी तो हो सकता है,
वो मिले या न मिले हाथ बढ़ा कर देखो...............
Saturday, April 03, 2010
साथ
पूरी धरा भी साथ दे तो और बात हैं, तू ज़रा भी साथ दे तो और बात हैं ! चलने को तो एक पैर पर भी चल रहे हैं लोग, दूसरा भी साथ दे तो और बात हैं.
1 comment:
nice
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