Saturday, January 22, 2011

जरूरी है !!

उसूलों पर जहाँ आंच आये, टकराना जरूरी है
जो जिंदा हो, तो फिर जिंदा नज़र आना जरूरी
है.............

By Gulzar

बस एक लम्हे का जगड़ा था,

दरो ओ दीवार पे ऐसे छानके से गिरी आवाज़
जैसे कॉच गिरता है................

हर एक शये मे गयी
उड़ती हुई जलती हुई किरचे

नज़र में, बात में, लहजे में,
सोच और साँस के अंदर

लहू होना था एक रिश्ते का
सो वो हो गया उस दिन

उसी आवाज़ के टुकड़े उठा के फ़र्श से
किसी ने काट ली नब्ज़

न की आवाज़ तक कुछ भी..
कि कोई जाग न जाये

बस

एक लम्हे का जगड़ा था

By Gulzar

उड़ते जाते हुए पंछी ने बस इतना ही देखा
देर तक हाथ हेलाती रही वो साख फिजा में

अलविदा कहने को या पास बुलाने को.....................