उसूलों पर जहाँ आंच आये, टकराना जरूरी है
जो जिंदा हो, तो फिर जिंदा नज़र आना जरूरी है.............
धूप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो, ज़िंदगी क्या है किताबों को हटा कर देखो.............., वो सितारा है चमकने दो यूँ ही आँखों में, क्या ज़रूरी है उसे जिस्म बनाकर देखो................, पत्थरों में भी ज़ुबां होती है दिल होते हैं, अपने घर के दरोदीवार सजा कर देखो............, फ़ासला नज़रों का धोखा भी तो हो सकता है, वो मिले या न मिले हाथ बढ़ा कर देखो...............
Saturday, January 22, 2011
By Gulzar
बस एक लम्हे का जगड़ा था,
दरो ओ दीवार पे ऐसे छानके से गिरी आवाज़
जैसे कॉच गिरता है................
हर एक शये मे गयी
उड़ती हुई जलती हुई किरचे
नज़र में, बात में, लहजे में,
सोच और साँस के अंदर
लहू होना था एक रिश्ते का
सो वो हो गया उस दिन
उसी आवाज़ के टुकड़े उठा के फ़र्श से
किसी ने काट ली नब्ज़
न की आवाज़ तक कुछ भी..
कि कोई जाग न जाये
बस
एक लम्हे का जगड़ा था
दरो ओ दीवार पे ऐसे छानके से गिरी आवाज़
जैसे कॉच गिरता है................
हर एक शये मे गयी
उड़ती हुई जलती हुई किरचे
नज़र में, बात में, लहजे में,
सोच और साँस के अंदर
लहू होना था एक रिश्ते का
सो वो हो गया उस दिन
उसी आवाज़ के टुकड़े उठा के फ़र्श से
किसी ने काट ली नब्ज़
न की आवाज़ तक कुछ भी..
कि कोई जाग न जाये
बस
एक लम्हे का जगड़ा था
By Gulzar
उड़ते जाते हुए पंछी ने बस इतना ही देखा
देर तक हाथ हेलाती रही वो साख फिजा में
अलविदा कहने को या पास बुलाने को.....................
देर तक हाथ हेलाती रही वो साख फिजा में
अलविदा कहने को या पास बुलाने को.....................
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