Tuesday, April 28, 2009

"हुई है रात तो सुबह भी जरुर होगी धैर्यरख
अपने कर्तव्यों के साथ आगे बढ़ हौसला रख"

Monday, April 27, 2009

आंख से हम जब कभी आंसू बहाने लग गए
बारहा फिर आप हमको याद आने लग गए

वक़्त पर मिलता नहीं है कोई भी अपने करीब
अपने अपने काम में सारे दीवाने लग गए

हमसे तुमसे जो हुई है जाने अनजाने खता
बस इसी उलझन को सुलझाते ज़माने लग गए

हम इन्ही ख्वाबों ख्यालों में ही डूबे रह गए
क्या पता कब चान्द तारे मुस्कराने लग गए

बस हमें तो रोज का अखबार समझा आपने
पढ़ लिया फिर रख दिया कुछ गुनगुनाने लग गए

इस तरह जज्बात ने झकझोड़ कर दिल रख दिया
आप शीशा तोड़कर क्यूं मुस्कराने लग गए

जब कभी सोने के पिंजरे में घुटा तोते का दम
बाग के सारे नज़ारे याद आने लग गए.........

--
Setu Gupta

Dosti

मैं नहीं जानता की एक दोस्त की सोच दुसरे दोस्त से क्या क्या चाहती है मैं बस यही जानता हूँ अच्छा दोस्त वो जो दोस्ती को निभाना जानता हो उसे पढना जानता हो उसकी भावनाओं की इज्जत करना जानता हो उसके साथ- साथ हर पल की जिन्दगी मैं खडा रहता हो

--
Setu Gupta

Waqt,,,,,,,,,

बस एक लम्हा ही काफ़ी है
भूल जाने को या याद आने को
मानो जैसे किसी के जादू सा कर दिया हो
चुटकी बजी सुई हिली और बस
छू मंतर ही हो जाते हैं ना
तन्हाई में बैठे बैठे
या भीड़ में ही सही कहीं
लेकिन जब एक दम से खो से जाते हैं
किसी और दुनिया में निकल जाते हैं
कुछ होश नहीं होता किसी का
पलक झपकी या नही.. साँस ली की नही
खा पी रहे हो या नहीं..
मानो खुली आँखों से
सोते हुए खाब देख रहे हैं
फिर क्या होना है..

चाय में डुबोया हुआ बिस्कुट जब
मुँह तक आते आते गोद में गिर जाता है
हड़बड़ा के होश में आते हैं
और लगभग भूल ही जाते हैं कि
कहाँ थे....क्य सोच रहे थे
रह जाती है तो एक मुस्कान या गहरी साँस
कि चलो बैठे बिठाए घूम आए...
है ना...!

--
Setu Gupta

Na tum jano na Hum

कितने बच्चे सोते हैं रोज़ रखकर पेट में लातें अपनी
बना नहीं अभी कच्चा है कह देती है रोकर जननी ।
भोर हुए उठते हैं जब पाते हैं दो ही सिकी रोटी
रोटी दो , बच्चे हैं छ: , भूख से बच्ची छोटी रोती,
कंठ डुबोकर आंसुओं में थककर बच्चे सो जाते हैं ।
सपनों में भी देखकर रोटी रोटी-रोटी चिल्लाते हैं ॥
एक तरफ है पैसों की कमी , एक तरफ खूब बर्बादी है
एक भाई हँसे रोये दूजा रोये भला ये कैसी आज़ादी है ।
अपनी जिद की खातिर कुछ लोग नित पानी सा धन बहाते हैं
तनिक-तनिक सी बात-बात पर देखो उत्सव मनाते हैं ।
नहीं कुछ परवाह औरों की इनको तो जश्न मनाना है ।
जो भरे हुए मस्त बादल हैं उनको ही नीर पिलाना है ॥
तुम चाहते हो उत्सव करना तो रोतों को हँसियाँ बाँटो
जो पानी पीकर जीते हैं तुम उनको रोटी बाँटो ।
हम अलग -अलग चलेंगे तो दुनिया हमको खा जायेगी
मिटटी के मोल बिक जायेंगे , दासता फ़िर से छा जायेगी
मिलकर सबको निज देश का फ़िर भाग्य बनाना होगा
जो घिरे हुए हैं अन्धेरे में उन्हें दीप दिखाना होगा ।
--
Setu Gupta

Zindgi

"मेरी जिन्दगी है, या समुंदरी तूफानों से घिरी कोई नाव,
जो डूब भी सकती है, और किनारे भी लग सकती है,
इन हालातों मैं जीना मौत से भी बदतर है,
मेरी सांसे मेरे सीने मैं चुभता हुआ नश्तर हैं,
हम तो जिन्दगी को बस खुअवो मैं ही देखा करते हैं,
इसीलिए हर रोज़ खुदा से मरने की दुआ करते हैं,
लेकिन मौत भी इतनी आसानी से कहाँ मिलती है,
न जाने हमें किस बात की सजा मिलती हैं ,
न जाने हमें किस बात की सजा मिलती है......

"मेरी जिन्दगी धुआं से हो गयी है,
शायद मुझसे मेरी मंजिल खो गयी है,
ए रास्ता न जाने किधर को जाता है,
या यूँ ही भटकते रहना जिन्दगी का तकाजा है
जिस मोड़ को भी समझा यही मंजिल है मेरी
वहां पहुंचे तो पाया रास्ता और भी लम्बा है,
न जाने ए शाम कब सुहानी होगी,
या यूँ ही बेखयाली में तेरा ख़याल आता है,
सहारे तो हम उसके भी जी लेंगे,
मगर तेरा एहसास कुछ ज्यादा है.
--
Setu Gupta

Ram Ram

Thumak chalat raamachandra
Thumak chalat raamachandra
Baajat painjaniyaan

Kilaki kilaki uthat dhaay girat bhuumi latapataay
Dhaay maat god let dasharath kii raniyaan
T

humak chalat raamachandra
Thumak chalat raamachandra
Baajat painjaniyaan

Aanchal raj ang jhaari vividh bhaanti so dulaari
Tan man dhan vaari vaari kahat mridu bachaniyaan

Thumak chalat raamachandra
Thumak chalat raamachandra
Baajat painjaniyaan

Vidrum se arun adhar bolat mukh madhur madhur
Subhag naasikaa men chaaru latakat latakaniyaan

Thumak chalat raamachandra
Thumak chalat raamachandra
Baajat painjaniyaan
Tulasiidaas ati anand dekh ke mukhaaravind
Raghuvar chhabi ke samaan raghuvar chhabi baniyaan
Thumak chalat raamachandra
Thumak chalat raamachandra
Baajat painjaniyaan



--
Setu Gupta

Riste.................

चाचा चाची ,मोसा मोसी
भाई बहन
खो गए रिश्ते
साथ खो गई
सवेदना ,गरिमा रिश्तो कि
आज तू कल मैं
जानता नहीं
पहचानता नहीं
रिश्तो कि गरिमा खो रही है
इंसानियत बीच चोराहे रो रही है
अब कोन पहचान बानयेगा
चाचा चाची मोसा मोसी मामा कहलायेगा
जब एक लड़का एक लड़की
तो किसको चाचा ,किसको मोसी
कह बुलाएगा
वही दो देख मुश्किलों से पढाएगा
दो रुपए आमदनी
चार रुपए खर्चा
फिर कर्जा उठाएगा
समाज मे रहने के लिए
अपनी को ऊँचा दिखाने के लिए
बैंको से लिया लोन उतर नहीं पायेगा
थक हार एक दीन फांसी पे चढ़ जायेगा

--
Setu Gupta

Tuesday, April 07, 2009

"Kimat"

Kimat pani ki nhi pyas ki hoti hai,
Kimat maut ki nhi saans ki hoti hai,
Dost to bahut hote hai duniya me
Kimat dosti ki nhi vishwas ki hotihai

...........................

वो अजनबी न जाने क्या क्या सिखा गया
आंसू भरी आँखों को हंसना सिखा गया !!!!!

सुना कागज ,,,,,,पर अपना था दिल
चन्द लाम्हातों में ही इसे अपना बना गया !!

जिंदगी रौशन थी,खुशियों से भरी थी
किसी कंधे पर सर रखकर रोना सिखा गया !!

मै आवारा था पंछी कोई ठिकाना नहीं था
वो अपने दिल को मेरा आशियाना बता गया !!

उसकी आँखों में अजब सी एक बात तो थी
दिल तोड़ कर किसी को रुलाना सिखा गया !!

अब उसकी गली में अपना ये हाल है अजीब
खुद को कुछ नहीं,मुझे अपना दीवाना बता गया !!!!

Jai Hind..

सुरक्षा के डर से IPL मैच विदेश मे खेला जायेगा,
एक साल बाद ऐसा भी सुनोगे,
कि १५ अगस्त को
आतकंवाद के डर से
तिरंगा London मे लेहराया जायेगा….


वाकई..... “ मेरा भारत महान “

ज़िंदगी हमेशा पाने के लिए नही होती,

ज़िंदगी हमेशा पाने के लिए नही होती,
हर बात समझाने के लिए नही होती,
याद तो अक्सर आती है आप की,
लकिन हर याद जताने के लिए नही होती

महफिल न सही तन्हाई तो मिलती है,
मिलन न सही जुदाई तो मिलती है,
कौन कहता है मोहब्बत में कुछ नही मिलता,
वफ़ा न सही बेवफाई तो मिलती है

उमर की राह मे रस्ते बदल जाते हैं,
वक्त की आंधी में इन्सान बदल जाते हैं,
सोचते हैं तुम्हें इतना याद न करें,
लेकिन आंखें बंद करते ही इरादे बदल जाते हैं


कभी कभी दिल उदास होता है
हल्का हल्का सा आँखों को एहसास होता है
छलकती है मेरी भी आँखों से नमी
जब तुम्हारे दूर होने का एहसास होता

Sunday, April 05, 2009

पतित पवन नाम तीहारो

पतित पवन नाम तीहारो,
मुझको पावन कर दो |
पतझड़ जैसा जीवन मेरा,
उसको सावन कर दो |

चरण पड़ा हूँ विनती सुन लो,
पाप-ताप को हरना!
श्रद्धा तुम पर मेरी प्रभु जी
मान हमारा रखना |
कुलषित तन मन निर्मल होवे ,
ऐसा मुझको वर दो ||

पतित हुए हैं करम हमारे ,
अपना मुझे बना लो |
करे याचना ‘दास नारायण ‘
मुझको तुम अपना लो !
हे ! रघुनन्दन - बनो सहायक
मन में आनंद भर दो ||

जिन्दगी तुझको जिया है कोई अफ़सोस नहीं

जिन्दगी तुझको जिया है कोई अफ़सोस नहीं,
ज़हर ख़ुद मैंने पिया है कोई अफ़सोस नहीं,

मैंने मुजरिम को भी मुजरिम न कहा दुनिया में,
बस यही जुर्म किया है कोई अफ़सोस नहीं,

मेरी किस्मत में जो लिखे थे उन्ही काँटों से,
दिल के ज़ख्मों को सीया है कोई अफ़सोस नहीं,

अब गिरे संग के शीशों की हूँ बारिश,
अब कफ़न ओढ़ लिया है कोई अफ़सोस नहीं,

धुआं बनाके फिजां में उड़ा दिया मुझको

धुआं बनाके फिजां में उड़ा दिया मुझको,
मैं जल रहा था किसी ने बुझा दिया मुझको,

खड़ा हूँ आज भी रोटी के चार हर्फ़ लिए,
सवाल ये है किताबों ने क्या दिया मुझको,

सफेद रंग की चादर लपेट कर मुझ पर,
फसीने शहर से किसी ने सजा दिया मुझको,

मैं एक ज़रा बुलंदी को छूने निकला था,
हवा ने थम के ज़मीन पर गिरा दिया मुझको,

फिर उसी राहगुज़र पर शायद

फिर उसी राहगुज़र पर शायद,
हम कभी मिल सकें मगर शायद,

जान पहचान से क्या होगा,
फिर भी ऐ दोस्त गौर कर शायद,

मुन्तज़िर जिन के हम रहे उन को,
मिल गए और हमसफ़र शायद,

जो भी बिछडे हैं कब मिले हैं,
फिर भी तू इंतज़ार कर शायद,

सफर मे धुप तो होगी जो चल सको तो चलो

सफर मे धुप तो होगी जो चल सको तो चलो,
सभी हैं भीड़ में तुम भी निकल सको तो चलो,

किसी के वास्ते राहें कहाँ बदलती है,
तुम अपने आप को ख़ुद ही बदल सको तो चलो,

यहाँ किसी को कोई रास्ता नहीं देता,
मुझे गिरा के अगर तुम संभल सको तो चलो,

यही है जिन्दगी कुछ ख्वाब चाँद उम्मीदें,
इन्ही खिलोनों से तुम भी बहल सको तो चलो,

तुम को हम दिल में बसा लेंगे तुम आओ तो सही

तुम को हम दिल में बसा लेंगे तुम आओ तो सही,
सारी दुनिया से छुपा लेंगे तुम आओ तो सही,

एक वादा करो अब हम से न बिछडोगे कभी,
नाज़ हम सारे उठा लेंगे तुम आओ तो सही,

बेवफा भी हो सितमगर भी जफ़ा पेशा भी,
हम खुदा तुम को बना लेंगे तुम आओ तो सही,

राह तारीक है और दूर है मंज़िल लेकिन,
दर्द की शमें जला लेंगे तुम आओ तो सही,

जिन्दगी तुने लहू ले के दिया कुछ भी नहीं

जिन्दगी तुने लहू ले के दिया कुछ भी नहीं,
तेरे दामन मैं मेरे वास्ते क्या कुछ भी नहीं,

मेरे इन हाथों की चाहो तो तलाशी ले लो,
मेरे हाथों में लकीरों के सिवा कुछ भी नहीं,

हम ने देखा है कई ऐसे खुदाओं को यहाँ,
सामने जिन के वो सच मुच का खुदा कुछ भी नहीं,

या खुदा अब के ये किस रंग में आई है बहार,
ज़र्द ही ज़र्द है पेडो पे हरा कुछ भी नहीं,

दिल भी एक जिद पे अड़ा है किसी बच्चे की तरह,
या तो सब कुछ ही इसे चाहिए या कुछ भी नहीं,



Really touch to my heart............................................

जिन्दगी तुने लहू ले के दिया कुछ भी नहीं,
तेरे दामन मैं मेरे वास्ते क्या कुछ भी नहीं,

मेरे इन हाथों की चाहो तो तलाशी ले लो,
मेरे हाथों में लकीरों के सिवा कुछ भी नहीं,

तुम ये कैसे जुदा हो गए

तुम ये कैसे जुदा हो गए,
हर तरफ़ हर जगह हो गए,

अपना चेहरा न बदला गया,
आईने से खफा हो गए,

जाने वाले गए भी कहाँ,
चाँद सूरज घटा हो गए,

बेवफा तो न वो थे न हम,
यूं हुआ बस जुदा हो गए,

बेबसी जुर्म है हौसला जुर्म है

बेबसी जुर्म है हौसला जुर्म है,
ज़िंदगी तेरी एक-एक अदा जुर्म है,

ऐ सनम तेरे बारे में कुछ सोचकर,
अपने बारे में कुछ सोचना जुर्म है,

याद रखना तुझे मेरा एक जुर्म था,
भूल जाना तुझे दूसरा जुर्म है,

क्या सितम है के तेरे हसीन शहर में,
हर तरफ़ गौर से देखना जुर्म है,

दोस्ती जब किसी से की जाए

दोस्ती जब किसी से की जाए,
दुश्मनों की भी राय ली जाए,

मौत का ज़हर है फिजाओं में,
अब कहाँ जा के साँस ली जाए,

बस इसी सोच में हूँ डूबा हुआ,
ये नदी कैसे पार की जाए,

मेरे माजी के ज़ख्म भरने लगे,
आज फिर कोई भूल की जाए,

बोतलें खोल के तू पी बरसों,
आज दिल खोल के भी पी जाए,

कैसे कैसे हादसे सहते रहे

कैसे कैसे हादसे सहते रहे,
हम यूँही जीते रहे हँसते रहे,

उसके आ जाने की उम्मीदें लिए,
रास्ता मुड़ मुड़ के हम तकते रहे,

वक्त तो गुजरा मगर कुछ इस तरह,
हम चरागों की तरह जलते रहे,

कितने चेहरे थे हमारे आस-पास,
तुम ही तुम दिल में मगर बसते रहे,

उल्फत का जब किसी ने लिया नाम रो पड़े

उल्फत का जब किसी ने लिया नाम रो पड़े,
अपनी वफ़ा का सोच के अंजाम रो पड़े,

हर शाम ये सवाल मोहब्बत से क्या मिला,
हर शाम ये जवाब के हर शाम रो पड़े,

राह-ऐ-वफ़ा में हमको खुशी की तलाश थी,
दो कदम ही चले थे के हर कदम रो पड़े,

रोना नसीब में है तो औरों से क्या गिला,
अपने ही सर लिया कोई इल्जाम रो पड़े,

Friday, April 03, 2009

जन्म सफल होगा बन्दे

बोलो राम जय जय राम,
जन्म सफल होगा बन्दे,
मन में राम बसा ले,
हे राम नाम के मोती को,
सांसो की माला बना ले,
राम पतित पवन करुनाकर,
और सदा सुख दाता,
सरस सुहावन अति मनभावन,
राम से प्रीत लगा ले,
मन में राम बसा ले,
मोह माया है झूटा बन्धन,
त्याग उसे तू प्राणी,
राम नाम की ज्योत जला कर,
अपना भाग जगा ले,
मन में राम बसा ले,
राम भजन में डूब के अपनी,
निर्मल कर ले काया,
राम नाम से प्रीत लगा के,
जीवन पर लगा ले,

जय रघुनन्दन जय सिया राम

जय रघुनन्दन जय सिया राम,
भज मन प्यारे जय सिया राम,
आदि राम अनंत है राम,
सत चित और अनंत है राम,
हनुमान के स्वामी राम,
दीनन के दुःख हारी राम,
मर्यादा पुर्शोतम राम,
पुरान ब्रम्ह सनातन राम,
तुलसी सुत तुलसी के राम,
करुना कर भक्तो के राम,
जय सिया राम जय जय सिया राम,

बोलो राम जय जय राम

बोलो राम जय जय राम,
मुनिमन रंजन भव भये भंजन,
असुर निकंदन सीता राम,
पतित उद्धारण जग जन तारण,
नित्ये निरंजन सीता राम,
दशरत नंदन सुर मुनि वंदन,
परेय्पप वंदन सीता राम,
जग सुख कारण जग जन पालन,
संतन जीवन सीता राम,
सत्ये सनातन मंगल कारन,
सगुण निरंजन सीता राम,
राम ही पावन अति मन भावन,
नर नारायण सीता राम,

जवाब जिनका नही वो सवाल होते है

जवाब जिनका नही वो सवाल होते है,
जो देखने में नही कुछ, कमाल होते है,

तराश्ता हूँ तुझे जिन में अपने लफ्जों से,
बहुत हसीन मेरे वो ख्याल होते है,

हसीन होती है जितनी बला की दो आँखें,
उसी बला के उन आंखों में जाल होते हैं,

वह गुनगुनाते हुए, यूँही, जो उठाते है,
क़दम कहाँ, वो क़यामत की चाल होते हैं,

फिर आज मुझे तुमको

फिर आज मुझे तुमको बस इतना बताना है,
हँसना ही जीवन है हँसते ही जाना है,

मधुबन हो या गुलशन हो पतझड़ हो या सावन हो,
हर हाल में इन्सां का इक फूल सा जीवन हो,
काँटों में उलझ के भी खुशबू ही लुटाना है,
हँसना ही जीवन है हंसते ही जाना है,

हर पल जो गुज़र जाये दामन को तो भर जाये,
ये सोच के जी लें तो तक़दीर संवर जाये,
इस उम्र की राहों से खुशियों को चुराना है,
हँसना ही जीवन है हँसते ही जाना है,

सब दर्द मिटा दें हम हर ग़म को सज़ा दें हम,
कहते हैं जिसे जीना दुनिया को सिखा दें हम,
ये आज तो अपना है कल भी अपनाना है,
हँसना ही जीवन है हँसते ही जाना है,

जब भी तन्हाई से घबरा के सिमट जाते हैं

जब भी तन्हाई से घबरा के सिमट जाते हैं,
हम तेरी याद के दामन से लिपट जाते हैं,

उन पे तूफान को भी अफ़सोस हुआ करता है,
वो सफिने जो किनारों पे उलट जाते हैं,

हम तो आए थे रहें साख में फूलों की तरह,
तुम अगर हार समझते हो तो हट जाते हैं,

अपने चेहरे से जो जाहिर है

अपने चेहरे से जो जाहिर है, छुपाये कैसे,
तेरी मरजी के मुताबिक नज़र आए कैसे,

घर सजाने का तसबुर तो बहुत बाद का है,
पहले यह तय हो के इस घर को बचाए कैसे,

कहकहा आंख का बर्ताव बदल देता है,
हँसने वाले तुझे आंसू नज़र आये कैसे,

कोई अपनी ही नज़र से जो हमे देखेगा,
एक कतरे को समंदर नज़र आये कैसे,

वो रुलाकर हंस न पाया देर तक

वो रुलाकर हंस न पाया देर तक,
जब मैं रो कर मुस्कुराया देर तक,

भूलना चाहा अगर उसको कभी,
और भी वो याद आया देर तक,

भूखे बच्चों की तसल्ली के लिए,
माँ ने फिर पानी पकाया देर तक,

गुनगुनाता जा रहा था इक फकीर,
धुप रहती है न साया देर तक,

कभी आंसू कभी खुशी बेची

कभी आंसू कभी खुशी बेची,
हम गरीबो ने बेकसी बेची,

चाँद साँसे खरीदने के लिए,
रोज़ थोडी सी ज़िंदगी बेची,

जब रुलाने लगे मुझे साये,
मैंने उकता के रौशनी बेची,

एक हम थे के बिक गए ख़ुद ही,
वरना दुनिया ने दोस्ती बेची,

मुझ में जो कुछ अच्छा है सब उसका है

मुझ में जो कुछ अच्छा है सब उसका है,
मेरा जितना चर्चा है सब उसका है,

उसका मेरा रिश्ता बड़ा पुराना है,
मैंने जो कुछ सोचा है सब उसका है,

मेरे आँखें उसकी नूर से रोशन है,
मैंने जो कुछ देखा है सब उसका है,

मैंने जो कुछ खोया था सब उसका था,
मैंने जो कुछ पाया है सब उसका है,

जितनी बार मैं टूटा हूँ वो टूटा था,
इधर उधर जो बिखरा है सब उसका है,

हर घड़ी ख़ुद से उलझना है मुकदर मेरा

हर घड़ी ख़ुद से उलझना है मुकदर मेरा,
मैं ही कश्ती हूँ मुझी मे है समंदर मेरा,

एक से हो गए मौसम्हो के चेहरे सारे,
मेरी आखो से कही खो गया मंजर मेरा,

किस से पुछु के कहा गुम हूँ कई बरसों से,
हर जगह दुन्द फिरता है मुझे घर मेरा,

मुद्दते हो गई एक खवाब सुन्हेरा देखे,
जागता रहता है हर नींद मे बिस्तर मेरा,

हम दोस्ती एहसान वफ़ा भूल गए है

हम दोस्ती एहसान वफ़ा भूल गए है,
जिंदा तो है जीने की अदा भूल गए है,
हम दोस्ती एहसान वफ़ा भूल गए है,

खुशबु जो लुटाती है मसलती है उसी को,
एहसान का बदला यही मिलता है कली को,
एहसान तो लेते है सिला भूल गए है,

करते है मोहब्बत का और एहसान का सौदा,
मतलब के लिए करते है इमान का सौदा,
डर मौत का और खौफ-ऐ-खुदा भूल गए है,

अब मोम पिघल कर कोई पत्थर नही होता,
अब कोई भी कुर्बान किसी पर नही होता,
यू भटकते है मंजिल का पता भूल गए है,

अब तो घबरा के ये कहते है के मर जायेंगे

अब तो घबरा के ये कहते हैं के मर जायेंगे,
मर के भी चैन ना पाया तो किधर जायेंगे,

लाये जो मस्त हैं तुरबत पे गुलाबी आँखें,
और अगर कुछ नहीं दो फूल तो धर जायेंगे,

हम नहीं वो जो करें खून का दावा तुझसे,
बल्क़ि पूछेगा ख़ुदा भी तो मुकर जायेंगे,

धुंआ उठा था दीवाने के जलते घर से

धुंआ उठा था दीवाने के जलते घर से सारी रात,
लेकिन वो ख़ामोश रहे दुनिया के ड़र से सारी रात,

रात यूँ जलते दिल पर तेरी यादों की बरासात हुई,
जैसे इक प्यासे की चिता पर बरखा बरसे सारी रात,

सारी रात तो सपने देखे सुबह को ये महसूस हुआ,
हम ने अपना सर टकराया इक पत्थर से सारी रात,

पत्ता पत्ता बूटा बूटा हाल हमारा जाने है

पत्ता पत्ता बूटा बूटा हाल हमारा जाने है,
जाने ना जाने गुल ही ना जाने बाग़ तो सारा जाने है,

चारागरी बीमारी-ए-दिल की रस्म-ए-शहर-ए-हुस्न नहीं,
वर्ना दिलबर-ए-नादां भी इस दर्द का चारा जाने है,

मेहर-ओ-वफ़ा-ओ-लुत्फ़-ओ-इनायत एक से वाक़िफ़ इन में नहीं,
और तो सब कुछ तन्ज़-ओ-कनाया रम्ज़-ओ-इशारा जाने है,

मेरे दिल ने कहा

मेरे दिल ने कहा, ऐ दीवाने बता,
जब से कोई मिला, तू है खोया हुआ,
ये कहानी है क्या, है ये क्या सिलसिला,

मैंने दिल से कहा, ऐ दीवाने बता,
धड़कने में छुपी, कैसी आवाज़ है,
कैसा ये गीत है कैसा ये साज़ है,
कैसी ये बात है, कैसा ये राज़ है,

मेरे दिल ने कहा, जब से कोई मिला,
चाँद तारे फिजां, फूल भंवरे हवा,
ये हसीन वादियाँ, नीला ये आसमान,
सब है जैसे नया, मेरे दिल ने कहा,

मैंने दिल से कहा, मुझको ये तो बता,
जो है तुझको मिला, उसमे क्या बात है,
क्या है जादूगरी, कौन है वो परी,

न वो कोई परी, न कोई महजबीं,
न वो दुनिया में सबसे ज्यादा हसीन,
भोली-भाली सी है, सीधी-साधी सी है,
लेकिन उसमे अदा एक निराली सी है,
उसके बिन मेरा जीना ही बेकार है,

मैंने दिल से कहा, बात इतनी सी है,
के तुझे प्यार है, मेरे दिल ने कहा,
मुझको इकरार है, हाँ मुझे प्यार है,

आप को देख कर देखता रह गया

आप को देख कर देखता रह गया,
क्या कहुँ और कहने को क्या रह गया,

आते आते मेरा नाम सा रह गया,
उसके होठों पे कुछ कांपता रह गया,

वो मेरे सामने ही गया और मैं,
रास्ते की त्तरह देखता रह गया,

झूठ वाले कहीं से कहीं बढ गये,
और मैं था के सच बोलता रह गया,

आंधियों के इरादे तो अच्छे ना थे,
ये दिया कैसे जलता रह गया,

ये हिंदुस्तान है

जिसे लोग कहते है हिंदुस्तान है,
यही अपने खावाबो का प्यारा जहान है,
कई मज्हबो का यहा एक निशान है,
ये हिंदुस्तान है, ये हिंदुस्तान है,

हर एक दिल मे मिटटी की खुशबु बसी है,
ख्यालो मे हर एक के मेहँदी रची है,
अंधेरे उजाले मे ये ज़िंदगी है,
मगर प्यार ही प्यार की रोशनी है,
हमारी मोहब्बत का ये आशियाँ है,
ये हिंदुस्तान है, ये हिंदुस्तान है,

अंधेरो मे जो आज भटके हुए है,
हमारे ही भाई है बहके हुए है,
सही रास्ता उनको दिखलायेंगे हम,
लगायेंगे सिने से समझायेंगे हम,
हमारा चलन तो बड़ा मेहरबान है,
ये हिंदुस्तान है, ये हिंदुस्तान है,

मुझसे मिलने के वो करता था बहाने कितने

मुझसे मिलने के वो करता था बहाने कितने,
अब गुजारेगा मेरे साथ ज़माने कितने,

मैं गिरा था तो बहुत लोग रुके थे लेकिन,
सोचता हूँ मुझे आए थे उठाने कितने,

जिस तरह मैंने तुझे अपना बना रखा है,
सोचते होंगे यही बात न जाने कितने,

तुम नया ज़ख्म लगाओ तुम्हे इससे क्या है,
भरने वाले है अभी ज़ख्म पुराने कितने,

राम सिमर राम सिमर

राम सिमर राम सिमर, इहे तेरे काज है,
माया को संग त्याग, प्रभु जू की सरन लाग,

जगत सुख मान मिथ्या, झूठो सब साज है,
सुपने जिउ धन पछान, काहे पर करत मान,

बरु की भीत जैसे, बसुधा को राज है,
नानक जन कहत बात, बिनस जैहै तेरो गात,
छीन छीन कर गयो काल, तैसे जात आज है,

मिलकर जुदा हुए तो

मिलकर जुदा हुए तो न सोया करेंगे हम,
एक दूसरे की याद में रोया करेंगे हम,

आंसू छलक छलक के सतायेंगे रात भर,
मोती पलक पलक में पिरोया करेंगे हम,

जब दूरियों की याद दिलों को जलायेगी,
जिस्मों को चांदनी में भिगोया करेंगे हम,

गर दे गया दगा हमें तूफ़ान भी,
साहिल पे कश्तियों को डुबोया करेंगे हम,

एक दीवाने को

एक दीवाने को ये आये हैं समझाने कई
पहले मै दीवाना था और अब हैं दीवाने कई

मुझको चुप रहना पड़ा बस आप का मुंह देखकर
वरना महफ़िल में थे मेरे जाने पहचाने कई

एक ही पत्थर लगे है हर इबादतगाह में
गढ़ लिये हैं एक ही बुत के सबने अफ़साने कई

आँख से दूर न हो दिल से उतर जायेगा

आँख से दूर न हो दिल से उतर जायेगा
वक़्त का क्या है गुज़रता है गुज़र जायेगा..

ड़ूबते ड़ूबते कश्ती को उछाला दे दूँ
मै नहीं कोई तो साहिल पे उतर जायेगा..

इस बार नहीं..................

इस बार नहीं
इस बार नहीं जब वो छोटी सी बच्ची मेरे पास अपनी खरोंच लेकर आयेगी
मैं उसे फूं-फूं कर नहीं बहलाऊँगा
पनपने दूंगा उसकी टीस को
इस बार नहीं

इस बार जब मैं चेहरो पर दर्द लिखा देखूंगा
नहीं गाऊँगा गीत पीड़ा भुला देने वाले
दर्द को रिसने दूगा , ऊतरने दूँगा अन्दर गहरे
इस बार नहीं

इस बार मैं ना मरहम लगाऊँगा
ना ही ऊठाऊँगा रूई के फोहे
और ना ही कहूँगा कि तुम आँखे बन्द कर लो
गर्दन ऊधर करलो मैं दवा लगा देता हूँ
देखने दूँगा सबको हम सबको खुले नंगे घाव
इस बार नहीं

इस बार जब ऊलझनें देखूँगा छटपटाते देखूँगा नहीं दौड़ूँगा ऊलझी डोर लपेटने
ऊलझनें दूँगा जब तक ऊलझ सके
इस बार नहीं

इस बार कर्म का हवाला देकर नहीं ऊठाऊँगा औजार
नहीं करूँगा फिर से एक नई शुरूआत
नहीं बनूँगा एक मिसाल एक कर्मयोगी की
नहीं आने दूँगा जिन्दगी को आसानी से पटरी पर
ऊतरने दूँगा उसे किचड़ में, टेढे मेढे रास्तों पे
नहीं सूखने दूँगा दिवारों पर लगा खून
हल्का नहीं पड़ने दूँगा उसका रंग
इस बार नहीं बनने दूँगा उसे इतना लाचार
कि पान की पीक और खून का फर्क ही खत्म हो जाए
इस बार नहीं

इस बार घावों को देखना है
गौर से
थोड़ा लम्बे वक्त तक
कुछ फैसले
और उसके बाद हौंसले
कहीं तो शुरूआत करनी ही होगी
इस बार यही तय किया है

wish u ... Very Happy Ram Naomi

Dear All,


Wish u all happy RAM NAOMI


दोहा- जोग लगन ग्रह बार तिथि सकल भए अनुकूल।
चर अरु अचर हर्षजुत राम जनम सुखमूल॥१९०॥

नौमी तिथि मधु मास पुनीता। सुकल पच्छ अभिजित हरिप्रीता॥
मध्यदिवस अति सीत न घामा। पावन काल लोक बिश्रामा॥
सीतल मंद सुरभि बह बाऊ। हरषित सुर संतन मन चाऊ॥
बन कुसुमित गिरिगन मनिआरा। स्त्रवहिं सकल सरिताऽमृतधारा॥
सो अवसर बिरंचि जब जाना। चले सकल सुर साजि बिमाना॥
गगन बिमल सकुल सुर जूथा। गावहिं गुन गंधर्ब बरूथा॥
बरषहिं सुमन सुअंजलि साजी। गहगहि गगन दुंदुभी बाजी॥
अस्तुति करहिं नाग मुनि देवा। बहुबिधि लावहिं निज निज सेवा॥

दोहा- सुर समूह बिनती करि पहुँचे निज निज धाम।
जगनिवास प्रभु प्रगटे अखिल लोक बिश्राम॥१९१॥



भए प्रगट कृपाला दीनदयाला कौसल्या हितकारी।
हरषित महतारी मुनि मन हारी अद्भुत रूप बिचारी॥
लोचन अभिरामा तनु घनस्यामा निज आयुध भुज चारी।
भूषन बनमाला नयन बिसाला सोभासिंधु खरारी॥
कह दुइ कर जोरी अस्तुति तोरी केहि बिधि करौं अनंता।
माया गुन ग्यानातीत अमाना बेद पुरान भनंता॥
करुना सुख सागर सब गुन आगर जेहि गावहिं श्रुति संता।
सो मम हित लागी जन अनुरागी भयउ प्रगट श्रीकंता॥
ब्रह्मांड निकाया निर्मित माया रोम रोम प्रति बेद कहै।
मम उर सो बासी यह उपहासी सुनत धीर पति थिर न रहै॥
उपजा जब ग्याना प्रभु मुसकाना चरित बहुत बिधि कीन्ह चहै।
कहि कथा सुहाई मातु बुझाई जेहि प्रकार सुत प्रेम लहै॥
माता पुनि बोली सो मति डौली तजहु तात यह रूपा।
कीजै सिसुलीला अति प्रियसीला यह सुख परम अनूपा॥
सुनि बचन सुजाना रोदन ठाना होइ बालक सुरभूपा।
यह चरित जे गावहिं हरिपद पावहिं ते न परहिं भवकूपा॥


दोहा- बिप्र धेनु सुर संत हित लीन्ह मनुज अवतार।
निज इच्छा निर्मित तनु माया गुन गो पार॥१९२॥

सुनि सिसु रुदन परम प्रिय बानी। संभ्रम चलि आई सब रानी॥
हरषित जहँ तहँ धाईं दासी। आनँद मगन सकल पुरबासी॥
दसरथ पुत्रजन्म सुनि काना। मानहुँ ब्रह्मानंद समाना॥
परम प्रेम मन पुलक सरीरा। चाहत उठत करत मति धीरा॥
जाकर नाम सुनत सुभ होई। मोरें गृह आवा प्रभु सोई॥
परमानंद पूरि मन राजा। कहा बोलाइ बजावहु बाजा॥
गुर बसिष्ठ कहँ गयउ हँकारा। आए द्विजन सहित नृपद्वारा॥
अनुपम बालक देखेन्हि जाई। रूप रासि गुन कहि न सिराई॥



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Setu Gupta

मेरा परिचय......

Hello Dear,

भीषण तूफानों में जो जलता दीया आपको मिल जायेगा बस आप उससे ही पूछ लेना कौन हू. मैं वो आपको बतलायेगा, मैं बात करू अपनी अगर आपसे तो आपको कुछ समझ नहीं आएगा, बस नयनो को पढ़ लेना मेरी और मेरा मोन आपको कुछ समझायेगा, अगर कहूँगा तो मेरे दग्ध ह्रदय पर,क्षण भर को तुम अकुलाओगे.पर मिलो मेरी मुस्कान से तुम मेरा दर्द समझ तब पाओगे, उस भाग्य लेख लिखने वाले को ,चरम का अर्थ समझ न आया था. पर मेरी माँ ने मुझको, इसका अर्थ समझाया था, और मुझे पुष्प निर्मित बतलाया था. मिलो मेरी उस माँ से कभी,वो अपना आँचल तुम्हे दिखायेगी. तब फिर स्वर्ग की भी इच्छा उस पल भूमिगत सी हो जायेगी

This is Setu Gupta. I am IT Manager in Multinational Company.
i like Gazals very much.