Tuesday, April 07, 2009

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वो अजनबी न जाने क्या क्या सिखा गया
आंसू भरी आँखों को हंसना सिखा गया !!!!!

सुना कागज ,,,,,,पर अपना था दिल
चन्द लाम्हातों में ही इसे अपना बना गया !!

जिंदगी रौशन थी,खुशियों से भरी थी
किसी कंधे पर सर रखकर रोना सिखा गया !!

मै आवारा था पंछी कोई ठिकाना नहीं था
वो अपने दिल को मेरा आशियाना बता गया !!

उसकी आँखों में अजब सी एक बात तो थी
दिल तोड़ कर किसी को रुलाना सिखा गया !!

अब उसकी गली में अपना ये हाल है अजीब
खुद को कुछ नहीं,मुझे अपना दीवाना बता गया !!!!

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