धूप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो,
ज़िंदगी क्या है किताबों को हटा कर देखो..............,
वो सितारा है चमकने दो यूँ ही आँखों में,
क्या ज़रूरी है उसे जिस्म बनाकर देखो................,
पत्थरों में भी ज़ुबां होती है दिल होते हैं,
अपने घर के दरोदीवार सजा कर देखो............,
फ़ासला नज़रों का धोखा भी तो हो सकता है,
वो मिले या न मिले हाथ बढ़ा कर देखो...............
Monday, April 27, 2009
Dosti
मैं नहीं जानता की एक दोस्त की सोच दुसरे दोस्त से क्या क्या चाहती है मैं बस यही जानता हूँ अच्छा दोस्त वो जो दोस्ती को निभाना जानता हो उसे पढना जानता हो उसकी भावनाओं की इज्जत करना जानता हो उसके साथ- साथ हर पल की जिन्दगी मैं खडा रहता हो
No comments:
Post a Comment