चाचा चाची ,मोसा मोसी
भाई बहन
खो गए रिश्ते
साथ खो गई
सवेदना ,गरिमा रिश्तो कि
आज तू कल मैं
जानता नहीं
पहचानता नहीं
रिश्तो कि गरिमा खो रही है
इंसानियत बीच चोराहे रो रही है
अब कोन पहचान बानयेगा
चाचा चाची मोसा मोसी मामा कहलायेगा
जब एक लड़का एक लड़की
तो किसको चाचा ,किसको मोसी
कह बुलाएगा
वही दो देख मुश्किलों से पढाएगा
दो रुपए आमदनी
चार रुपए खर्चा
फिर कर्जा उठाएगा
समाज मे रहने के लिए
अपनी को ऊँचा दिखाने के लिए
बैंको से लिया लोन उतर नहीं पायेगा
थक हार एक दीन फांसी पे चढ़ जायेगा
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Setu Gupta
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