धुंआ उठा था दीवाने के जलते घर से सारी रात,
लेकिन वो ख़ामोश रहे दुनिया के ड़र से सारी रात,
रात यूँ जलते दिल पर तेरी यादों की बरासात हुई,
जैसे इक प्यासे की चिता पर बरखा बरसे सारी रात,
सारी रात तो सपने देखे सुबह को ये महसूस हुआ,
हम ने अपना सर टकराया इक पत्थर से सारी रात,
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