मुझसे मिलने के वो करता था बहाने कितने,
अब गुजारेगा मेरे साथ ज़माने कितने,
मैं गिरा था तो बहुत लोग रुके थे लेकिन,
सोचता हूँ मुझे आए थे उठाने कितने,
जिस तरह मैंने तुझे अपना बना रखा है,
सोचते होंगे यही बात न जाने कितने,
तुम नया ज़ख्म लगाओ तुम्हे इससे क्या है,
भरने वाले है अभी ज़ख्म पुराने कितने,
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