Sunday, April 05, 2009

जिन्दगी तुने लहू ले के दिया कुछ भी नहीं

जिन्दगी तुने लहू ले के दिया कुछ भी नहीं,
तेरे दामन मैं मेरे वास्ते क्या कुछ भी नहीं,

मेरे इन हाथों की चाहो तो तलाशी ले लो,
मेरे हाथों में लकीरों के सिवा कुछ भी नहीं,

हम ने देखा है कई ऐसे खुदाओं को यहाँ,
सामने जिन के वो सच मुच का खुदा कुछ भी नहीं,

या खुदा अब के ये किस रंग में आई है बहार,
ज़र्द ही ज़र्द है पेडो पे हरा कुछ भी नहीं,

दिल भी एक जिद पे अड़ा है किसी बच्चे की तरह,
या तो सब कुछ ही इसे चाहिए या कुछ भी नहीं,



Really touch to my heart............................................

जिन्दगी तुने लहू ले के दिया कुछ भी नहीं,
तेरे दामन मैं मेरे वास्ते क्या कुछ भी नहीं,

मेरे इन हाथों की चाहो तो तलाशी ले लो,
मेरे हाथों में लकीरों के सिवा कुछ भी नहीं,

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