Tuesday, November 03, 2009

Setu==PUL

पुल
लोग लोगों के दरमियाँ
पुल की जगह
दीवारें बनाते हैं
और दुनिया के मेले में
खुद को तनहा पाते हैं

इंसान इंसान के बीच
एक अजनबीपन सा क्यों हैं
क्यों समेटे रखते हैं हम खुद को
अपने ही बनाये किले में
बना लेते हैं अपने इर्द गिर्द
कछुए सा एक सुरक्षा कवच
असुरखा और अविश्वास से भरे
सहमे सहमे डरे डरे
ज़रा सी अजनबी आहट होते ही
सिमट जाते हैं उस कवच में

एक बार,हाँ,सिर्फ एक बार
कर जाओ पार,अविश्वास की दीवार
गेरों से सुख दुःख सांझे कर
गिरा दो दूरियों की दीवार

तुम वो ईंट बन कर देखो
जो दीवार में नहीं
पुल में लगाई जायेगी
जीने की रीत,तुम्हे
खुद बखुद आ जायेगी

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