Tuesday, November 03, 2009

TUMHI BATAO NA

तुम्ही बताओ ना
मेरी नींद को पंख लगे जब
क्या तुम्हारी भी संग
उढा ले गयी
या फिर अधजगी रात में
तारे गिनने की रस्म
मैं इकतरफा निभा गयी

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