Wednesday, March 31, 2010

ख्वाब

" वो जानती है , उसका आकाश
कितना छोटा और सिमटा है ;
उसे पता है ,
एक फटी चादर और दो रोटियों में
रात नहीं कटती ;
और ......
वो यह भी समझती है कि ,
न आज कुछ बदला था
न कल कोई नयी सुबह होगी ,
इसलिए तो......
बस " मुट्ठी भर ख्वाब " लेकर ही
सोती है वो रोज़ ......

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