खा जाए..
हर बाल की खाल की यह चाल भी खा जाए..
इसके हाथ पढ़ जाए तो यह महीने साल भी खा जाए..
किसी बेहाल का बचा जो हाल भी हाल खा जाए..
बेमौत मरते मनन का यह मलाल खा जाए...
लालू का लाल खा जाए..
नक्सल बारी की नाल खा जाए..
बचपन का धमाल खा जाये..
बुढ़ापे की सहल खा जाये..
हया तोह छोड़ो बहेया की चाल भिया खा जाए..
अगर परोसा जा सके तोह ख्याल भी खा जाए..
1 comment:
Superb..
Post a Comment