धूप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो,
ज़िंदगी क्या है किताबों को हटा कर देखो..............,
वो सितारा है चमकने दो यूँ ही आँखों में,
क्या ज़रूरी है उसे जिस्म बनाकर देखो................,
पत्थरों में भी ज़ुबां होती है दिल होते हैं,
अपने घर के दरोदीवार सजा कर देखो............,
फ़ासला नज़रों का धोखा भी तो हो सकता है,
वो मिले या न मिले हाथ बढ़ा कर देखो...............
Wednesday, May 06, 2009
क्यों डरें ज़िन्दगी में क्या होगा
क्यों डरें जिन्देगी में क्या होगा कुछ ना होगा तो तजरूबा होगा
हँसती आँखों में झाँक कर देखो कोई आँसू कहीं छुपा होगा
इन दिनों ना उम्मीद सा हूँ मैं शायद उसने भी ये सुना होगा
देखकर तुमको सोचता हूँ मैं क्या किसी ने तुम्हें छुआ होगा
No comments:
Post a Comment