आप भी अब मिरे गम बढ़ा दीजिए
मुझको लंबी उमर की दुआ दीजिए
मैँने पहने हैँ कपड़े, धुले आज फिर
तोहमतें अब नई कुछ लगा दीजिए
रोशनी के लिए, इन अँधेरों में अब
कुछ नही तो मिरा दिल जला दीजिए
चाप कदमों की अपनी मैं पहचान लूँ
आईने से यूँ मुझको मिला दीजिए
गर मुहब्बत ज़माने में है इक ख़ता
आप मुझको भी कोई सज़ा दीजिए
चाँद मेरे दुखों को न समझे कभी
चाँदनी आज उसकी बुझा दीजिए
हंसते हंसते जो इक पल में गुमसुम हुई
राज़ "श्रद्धा" नमीं का बता दीजिए
धूप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो, ज़िंदगी क्या है किताबों को हटा कर देखो.............., वो सितारा है चमकने दो यूँ ही आँखों में, क्या ज़रूरी है उसे जिस्म बनाकर देखो................, पत्थरों में भी ज़ुबां होती है दिल होते हैं, अपने घर के दरोदीवार सजा कर देखो............, फ़ासला नज़रों का धोखा भी तो हो सकता है, वो मिले या न मिले हाथ बढ़ा कर देखो...............
Tuesday, September 15, 2009
मैँने पहने हैँ कपड़े, धुले आज फिर
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