Tuesday, September 15, 2009

हे रोम रोम में बसने वाले राम

हे रोम रोम में बसने वाले राम ।
जगत के स्वामी हे अंतर्यामी ।
मैं तुझसे क्या माँगू ॥

भेद तेरा कोई क्या पहचाने ।
जो तुझसा हो वो तुझे जाने ।
तेरे किये को हम क्या देवे ।
भले बुरे का नाम ॥

1 comment:

MAYUR said...

बहुत अच्छे और पवन विचार हैं, श्री राम जी की जय
श्री राम जी संसार से कुंठाओं को मिटायें
अपनी अपनी डगर