Tuesday, September 15, 2009

मैँने पहने हैँ कपड़े, धुले आज फिर

आप भी अब मिरे गम बढ़ा दीजिए
मुझको लंबी उमर की दुआ दीजिए

मैँने पहने हैँ कपड़े, धुले आज फिर
तोहमतें अब नई कुछ लगा दीजिए

रोशनी के लिए, इन अँधेरों में अब
कुछ नही तो मिरा दिल जला दीजिए

चाप कदमों की अपनी मैं पहचान लूँ
आईने से यूँ मुझको मिला दीजिए

गर मुहब्बत ज़माने में है इक ख़ता
आप मुझको भी कोई सज़ा दीजिए

चाँद मेरे दुखों को न समझे कभी
चाँदनी आज उसकी बुझा दीजिए

हंसते हंसते जो इक पल में गुमसुम हुई
राज़ "श्रद्धा" नमीं का बता दीजिए

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