Wednesday, July 20, 2011

खुशियों

हम बड़ी खुशियों के लिए छोटे छोटे खुशियों के पलों को अहमियत नहीं देते. मगर जब अंत में मंथन करते हैं तो यही लगता है कि सुकून तो एक छोटी सी ख़ुशी में भी हो सकता है, अगर वह हमें अन्दर से महसूस हुई है तो....मैं तो यही कहूँगा... . मैं उम्र भर सोचा कि मेरा सफ़र क्या था, जो जिंदगी भर किया, वो बसर क्या था, आज मीठी सी नींद आई तो पता चला, कि उस मुस्कराहट में असर क्या था."

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