Sunday, July 10, 2011



बस, हवा ही भरी है गोलों में
सुई चुभ जाए तो पिचक जाएँ

लोग ग़ुस्से में बम नहीं बनते !

-- गुलज़ार

ग़ुस्सा... प्यार ही की तरह हमारे व्यक्तित्व का एक हिस्सा होता है... बुरा ही सही, पर होता है... हर किसी में... कितनी बार ऐसा होता है कि हम जाने-अनजाने, अपने अपनों को कुछ ऐसा बोल देते हैं ग़ुस्से में, जो उन्हें तो तकलीफ़ देता ही है साथ ही ख़ुद हमें भी उतनी ही चोट पहुंचाता है... पर वो कहते हैं ना कमान से निकला हुआ तीर और मुँह से निकले हुए शब्द कभी वापस नहीं आ पाते... वो तो एक बार निकलने के बाद बस चोट ही पहुँचाते हैं... कोई "undo" कमांड नहीं चलता उनपे... और आप फिर चाह कर भी कुछ नहीं कर पाते सिवाय अफ़सोस के, कि आपने ऐसा क्यूँ कहा...

ऐसा क्यूँ होता है कि आप जिसे सबसे ज़्यादा प्यार करते हैं उसे ही सबसे ज़्यादा चोट पहुँचाते हैं जाने-अनजाने, ना चाहते हुए भी... फिर चाहे वो हमारे माँ-बाबा हों, भाई-बहन हों, यार-दोस्त हों या कोई भी अपना, जिसे आप दिल से सिर्फ़ और सिर्फ़ प्यार करते हैं... जिसका बुरा करना तो दूर की बात है, आप उसके बारे में बुरा सोच भी नहीं सकते... पर इन्सान हैं तो ग़लतियाँ करना भी लाज़मी है... परफेक्ट तो हो नहीं सकते... हम ग़लतियाँ भी करते हैं और उनका एहसास होने पर पछतावा भी...

पर ये सब तब होता है जब ग़ुस्सा कर के अपना और सामने वाले का, दोनों का ही मूड ख़राब कर चुके होते हैं... उस वक़्त तो ग़ुस्से में कुछ समझ ही नहीं आता सही-ग़लत... पता है ये ग़ुस्सा बहुत बुरा होता है... आपसे सारे अच्छे शब्द छीन लेता है और सारे बुरे और कड़वे शब्द आपको दे जाता है... जिन्हें बोलने का आपको बाद में अफ़सोस होता है... इसलिए ग़ुस्से में हमेशा शान्त रहना चाहिये... हम भी ऐसा ही करते हैं अक्सर... पर कभी कभी जाने कहाँ से ये कड़वे शब्द आ ही जाते हैं... देखो ज़रा अभी दिमाग़ शान्त है तो हम भी कैसी समझदारी की बातें कर रहे हैं :) ग़ुस्सा सच में बड़ा बुरा होता है...

अब ग़लती तो होती है हमसे, तो उसके लिये माफ़ी माँगना भी बनता है, पर माफ़ी जब भी माँगे दिल से माँगे... सिर्फ़ औपचारिकतावश "सॉरी" बोल देना माफ़ी माँगना नहीं होता... वो तो सिर्फ़ अपने लिये होता है... ख़ुद का अपराधबोध दूर करने के लिये... कोशिश करें कि जिस वजह से सामने वाले का दिल दुखा वो काम ही ना करें दोबारा... और एक बात तो है हमें पता है भले ही हम कितना भी नाराज़ हो जाएँ या ग़ुस्सा कर लें... हमारे अपने हमेशा हमारे साथ रहते हैं... भले सामने से ऐसा दिखाएँ ना पर दिल से तो साथ ही होते हैं...

पर जैसे ही आपको अपनी ग़लती का एहसास हो... माफ़ी मांगने में कभी देर मत करिये... झिझकिये मत... क्यूँकि कई बार ज़िन्दगी हमें ये मौका भी नहीं देती...

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