धूप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो,
ज़िंदगी क्या है किताबों को हटा कर देखो..............,
वो सितारा है चमकने दो यूँ ही आँखों में,
क्या ज़रूरी है उसे जिस्म बनाकर देखो................,
पत्थरों में भी ज़ुबां होती है दिल होते हैं,
अपने घर के दरोदीवार सजा कर देखो............,
फ़ासला नज़रों का धोखा भी तो हो सकता है,
वो मिले या न मिले हाथ बढ़ा कर देखो...............
Sunday, July 10, 2011
खुशबू की ज़बां में बोलो सभी
गुलज़ार : एक व्यक्तित्व, एक नाम, एक एहसास, एक खुशबू...
एक ने कहानी गढ़ी, सुनाई, एक ने गीत बुने, नज़्में पहनाई एक ने आवाज़ से, एक ने अल्फ़ाज़ की ख़ुशबू से मेरी ज़िन्दगी महकायी कई गुलज़ार हैं, इक गुलज़ार का बदन ओढ़े हुए
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