आज फिर चाँद की पेशानी से उठता है धुआँआज फिर महकी हुई रात में जलना होगा
आज फिर सीने में उलझी हुई वज़नी साँसें
फट के बस टूट ही जाएँगी, बिखर जाएँगी
आज फिर जागते गुज़रेगी तेरे ख्वाब में रात
आज फिर चाँद की पेशानी से उठता धुआँ
**********************************************************
आप की ख़ातिर अगर हम लूट भी ले आसमांक्या मिलेगा चंद चमकीले से शीशे तोड़ के
चाँद चुभ जायेगा ऊँगली में तो खून आ जायेगा !
**********************************************************
रात के पेड़ पे कल ही देखा थाचाँद, बस, पक के गिरने वाला था
सूरज आया था, ज़रा उसकी तलाशी लेना !
**********************************************************
चाँद के माथे पर बचपन की चोट के दाग़ नज़र आते हैंरोड़े, पत्थर और गुल्लों से दिन भर खेला करता था
बहुत कहा आवारा उल्काओं की संगत ठीक नहीं !
**********************************************************
सितारे चाँद की कश्ती में रात लाती हैसहर के आने से पहले ही सब बिक भी जाते हैं
बहुत ही अच्छा है व्यापार इन दिनों शब का !
**********************************************************
मां ने जिस चांद सी दुल्हन की दुआ दी थी मुझेआज की रात वह फ़ुटपाथ से देखा मैंने
रात भर रोटी नज़र आया है वो चांद मुझे !
**********************************************************
कुछ ऐसी एहतियात से निकला चाँद फिरजैसे अँधेरी रात में खिड़की पे आओ तुम
क्या चाँद और ज़मीन में भी कुछ खिंचाव है !
**********************************************************
जब-जब पतझड़ में पेड़ों सेपीले पीले पत्ते,
मेरे लॉन में आ कर गिरते हैं,
रात को छत पर जा कर मैं
आकाश को ताकता रहता हूँ
लगता है कमज़ोर सा पीला चाँद भी शायद
पीपल के सूखे पत्ते सा,
लहराता लहराता मेरे लॉन में आ कर उतरेगा !
-- गुलज़ार
No comments:
Post a Comment