जब हम वैज्ञानिकों के सामने विज्ञान की बिग-बैन्ग थ्योरी को अपने नजरिये से पेश किया तो पूरा सभागार खुश और हैरान हो गया. लाइफ़ के ईवोल्युशन, सैल कैसे बना और कैन्सर क्या होता है गुलज़ार साब ने बहुत ही खूबसूरत अन्दाज़ में बयां किया.
अपनी नज़्म 2085 में बड़ी एनेर्जी और छोटी एनेर्जी के गुफ़्तगु को क्या खूब बयां किया उन्होने.
उनके अनुसार, वैज्ञानिक और साहित्यकार काफी सिमिलर होते हैं, वैज्ञानिक को फ़ैक्ट्स सर्च करके लिखना पड़ता है और साहित्यकार को महसूस करके.
दोनो के अन्तर पर एक ही नज़्म के दो हिस्से बयां किये
वैज्ञानिक:
"मेरी ख़ुदी को मारना चाहा तुमने चंद चमत्कारों से
और मेरे एक प्यादे ने चलते चलते
तेरा चांद का मोहरा मार लिया"
शायर:
"मौत को शह देकर तुमने समझा था अब तो मात हुई
मैने जिस्म का खोल उतार कर सौंप दिया, और रूह बचा ली"
"पूरे का पूरा आकाश घुमा कर अब तुम देखो बाज़ी"
No comments:
Post a Comment