“मुंबई”
बड़ी लम्बी सी मछली की तरह लेटी हुई पानी में ये नगरी
कि सर पानी में और पांव जमीं पर हैं
समन्दर छोड़ती है , ना समन्दर में उतरती है
ये नगरी बम्बई की..
इंसान की उम्मीद से बड़ी बिल्डिंग्स..
और उनसे भी बड़े उसके ख्वाब ..
दिन भर जानवरों की तरह से भागता हुआ इंसान...
और रात में कुछ धुड्ती हुई आँखे...
यही है... मुंबई मेरी जान... बस यही है...मुंबई
कल पहली बार लगा था खून खौले तो रूह भी खौलती है, भूरे जिस्म की मट्टी में इस देश की मट्टी बोलती है, हम क्या.. सब हैरान थे और जो हुआ उसके लिए कोई शब्द नहीं है... फिर आज पान की पीक और खून का फर्क ही खत्म हो गया..
एक और बम फूटा ..
एक और स्वप्न टूटा ..
कुछ लाशें बिछी ..कुछ और चूड़ियाँ टूटी ..
कुछ नाम और कई सिन्दूर मिट गए सदा के लिए ...
इंसान ने जता दिया फिर से
कि जानवर कोई नहीं बड़ा उससे !
·आखिर कब तक इस तरह निर्दोष लोग मौत के साए में समाते रहेंगे......?
·कब तक हम आतंकी हमलों की बरसी मनाते रहेंगे......?
·आखिर कब तक आतंककारी इस देश को अपनी सैरगाह बनाए रखेंगे.......?
·कब तक हम सुरक्षा एजेंसियों के भरोसे अपनी नाक के नीचे इस तरह की गतिविधियों को अंजाम होते देखते रहेंगे.....?
कल मेरे पास जितने भी फ़ोन आये या मेल या फिर नेट्वोर्किंग साइड से, सब का यही था, सब यही जानना चाहिते थे.. कि.., कि मै ठीक हु और कहाँ हु... हा..बॉस मै ठीक हु और जिंदा हु.. घर पर ही हु.. लेकिन उनका क्या... जो अब हमारे आपके बीच नहीं रहे...
पता नहीं ये सरकार हमसे क्या कराना चाहिती है…
इंडिया में आज हम सब से जादा कसाब सुरछित है…अपना बर्थडे मना रहा है.. वाह वाह.. हम जो इस देश के नागरिक है शायद शर्म आ रही है ये बात करते... और कसाब को फील गुड महसूस हो रहा होगा... क्यूंकि एक आम नागरिक के नसीब में तो कभी नहीं है इतनी आहोबगेत.. उफ़ “अतिथि देवो भावो” शायद अब इन शब्दों के माने ही बदल गए है..
एक इंजिनियर होने के नाते, हम भी किसी बेकार कोड को साजों को न रख कर करते है... हम क्या कोई भी...
एक किसान, अपने खेत को बर्बाद करने वाले किसी को नहीं छोड़ता चाहे वो एक कीडा हो या क्यूँ न कोई जानवर...
ये आप आपने आपमें भी देख सकते है... फिर ये कसाब हमारे यहाँ क्या कर रहा है..
क्या हुआ, जो कुछ लोग मर गए.. शायद हम इंडिया में आपने जीने और रहने की कीमत अदा कर रहे है?
लेकिन कब तक.. हम ये कीमत अदा करते रहेगे.. आज़ादी के इतने साल बाद भी क्या हम आज़ाद है..?
उनके लिए जो इस दुनिया में नहीं रहे, उनके लिए क्या इतना कहना काफी है क्या...
हम को गलिब ने ये दुआ दी थी
तुम सलामत रहो हज़ार बरस
ये बरस तो फकत दिनों में गया
लेकिन दोस्तों आपने आपने दिल पे हाथ रख कर सोचो.. कब तक..
झूठी सच्ची आस पे जीना कब तक आखिर, आखिर कब तक
मय की जगह खून-ए-दिल पीना कब तक आखिर, आखिर कब तक
ये अक्ल की बातें करने वाले (Indian System) को बस इतना ही..
एक महीने के वादे पर एक साल गुजारा फिर भी ना आये
वादे का ये एक एक महीना कब तक आखिर, आखिर कब तक..
हर मौत आपने पीछे निशान छोड़ गयी है.. ये निशान उनके गवाह है,.. जिन लोग ने अपने प्रियजनों को खो दिया है.. मेरी हार्दिक संवेदना है उन सब के साथ में..
गुलज़ार के शब्दों में कहे को...
आज फिर चाँद की पेशानी से उठता है धुआँ
आज फिर महकी हुई रात में जलना होगा
आज फिर सीने में उलझी हुई वज़नी साँसें
फट के बस टूट ही जाएँगी, बिखर जाएँगी
आज फिर जागते गुज़रेगी तेरे ख्वाब में रात
आज फिर चाँद की पेशानी से उठता धुआँ
आज से ठीक एक महीने बाद हम आज़ादी का जश्न मना रहे होगे... क्यूंकि कुछ हम जिंदा बच गए... कब तक आखिर कब तक.. कब तक हम ये झूटी आज़ादी का जश्न मानते रहेगे...
एक साल बाद ऐसा भी सुनोगे,
कि १५ अगस्त को
आतकंवाद के डर से
तिरंगा लन्दन मे लेहराया जायेगा….
लेकिन वाकई..... “मेरा भारत महान”
लोग पहले और आज भी महात्मा गाँधी को याद करते है पसंद करते है.. बस फर्क इतना सा है.. कि आज सूरत और सीरत दोनों ही बदल गयी है..
ये जो ज़िन्दगी की किताब है ये किताब भी क्या खिताब है, कहीं एक हसीं सा ख्वाब है कही जान-लेवा अज़ाब है
दोस्तों, मुझे नहीं पता ये सब कैसे समाप्त होगा और किस तरीके से.. मेरे मन और दिमाग में उस हादसे के बाद बहुत कुछ चल रहा था और है.. जिसको मै कण्ट्रोल नहीं कर पा रहा हु .. इसलिये आप सभी के साथ शेयर का रहा हु..
लेकिन अब बहुत हुआ..
दिल भी एक जिद पे अड़ा है किसी बच्चे की तरह
या तो सब कुछ ही इसे चाहिए या कुछ भी नहीं
I am feeling very angry right now asks! We bloody work so hard & contribute the maximum to Delhi’s coffers, and this is what we get in return? Our central & state government can’t even assure us that we’ll reach home safe after a day at work? Our money gets wasted on stupid things like commonwealth games? Why can’t money be spent on our security? How do our politicians sleep at night? Do they have no sense of responsibility?
Exactly I m Ask! What are we to do? Stay hidden at home? Our government is busy looting our money, they have nothing but pennies left for our security.
I hope at least this time the government react to this and make sure that necessary measure or take to put a stop to this kind of inhuman acts.
मै राम प्रसाद बिस्मिल के शहर से हु.. और उन्ही की लिखी हुई कुछ लाइन के साथ समाप्त करता हु..
सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
देखना है ज़ोर कितना बाज़ू-ए-क़ातिल में है।
ऐ वतन, करता नहीं क्यूँ दूसरी कुछ बातचीत,
देखता हूँ मैं जिसे वो चुप तेरी महफ़िल में है
वक़्त आने पर बता देंगे तुझे, ए आसमान,
हम अभी से क्या बताएँ क्या हमारे दिल में है,
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सेतु गुप्ता.. १४-जून- २०११ मुंबई..
1 comment:
nice one
i am also from shahjahanpur (u.P)
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